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This website is part of Sadinama Group.It is based in Kolkata,West Bengal. Sadinama Patrika.Sadinama Prakashan. Sadinama Rozana Bulletin, www.sundervan.comwww.safarnamah.com, and www.sadinama.in, are some mega projets of this group.Our Group Editor is Jitendra Jitanshu. this website is run by Writers, Poets, Historins of Various Languages of diffrent Countires.The aim of Website is- Making Creative World better for Tomorrow.Vision of Website is-Sadinama is thriving to make into world for better tomorrow along with facts of glorious pasts which is hard to find an any textbooks or websites. Our Website www.safarnama.com is also looking forward to designing any tourism experience in any Indian City based on Kali Circuit in Kolkata and based on museums, spiritual etc. subjects which makes a spellbound experience for our tourists. Tourism based on one subject in a city or state is hard to find anywhere that’s why we are taking up this project to showcase different places in a day or two for enthralling experience for tourists in any city or state. Projects on different places.In this website we are Providing Solo Travelling easy in India.

हमारे बारे में
सदीनामा जनवरी २००० से प्रकाशित होने वाली पत्रिका है| इसके संस्थापक सदस्यों में थे नीलम शर्मा ‘अंशु’, चंदन स्वप्निल और जीतेन्द्र ‘जितांशु’| अपनी व्यवसायिक प्रतिबद्धताओं के कारण यह टीम पहले दो संस्थापक अब सक्रिय नहीं हैं|
सदीनामा ने अपने को बहुआयामी किया है| आज इसकी तीन वेबसाईट हैं|
1. www.sundervan.com
2. www.safarnamah.com
3. www.sadinama.in
सदीनामा ने अपने प्रकाशन विभाग, सदीनामा प्रकाशन की शुरूआत पंजाबी पुस्तक डिभरी टाइट से की, जिसके लेखक लंदन रहने वाले कथाकार तेजेन्द्र शर्मा हैं| अभी तक १०० से ऊपर पुस्तकें प्रकाशित की गई हैं और यह क्रम लगातार जारी है|
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय समन्वयन की बहुत जरूरत है| यह काम सिर्फ सरकारों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता| अतः विभिन्न प्रान्तों के रचनाकार, कलाकार, इतिहासकार इसे समृद्ध करेंगे| इसके अलावा एकल सांस्कृतिक यात्राएँ आयोजित करने की कोशिश भी रहेगी|

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अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ हाल में हुई झड़प की घटना के परिपेक्ष्य में आया सेना का आया महत्वपूर्ण 27 जनवरी, 2023, कोलकाता प्रेस क्लब और सेना द्वारा आयोजित पी की में भारतीय थल सेना के पूर्वी कमांडर आरपी कलिता ने शुक्रवार को बताया कि चीन से लगती भारतीय सीमा पर स्थिति फिलहाल सामान्य है। अगर कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, तो सेना हर तरह की चुनौती से निपटने को तैयार है। पूर्वी कमान के कमांडर कलिता कोलकाता प्रेस क्लब में मीडिया से मुखातिब हो कर कहा कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ हाल में हुई झड़प की घटना के परिपेक्ष्य में उनका यह बयान बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार सीमा पार होने वाली गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और हम भविष्य में किसी भी तरह की उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार हैं। कलिता ने कहा कि पूरी समस्या इस बात से उत्पन्न होती है कि भारत व चीन के बीच की सीमा अपरिभाषित है। एलएसी के बारे में दोनों देशों की अलग-अलग धारणाएं हैं, जो भिड़ंत की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि हालांकि सिक्किम व अरुणाचल प्रदेश से लगती चीन सीमा पर स्थित अभी सामान्य हैं, लेकिन सीमाओं के परिसीमन की अनुपस्थित के कारण भविष्य के लिए कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा सकता है। कलिता ने कहा कि पूर्वी कमान की सेना पूर्वी सीमाओं पर क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है और इस कार्य को हमारी इकाइयों और संरचनाओं द्वारा अत्यंत पेशेवर और समर्पण के साथ निष्पादित किया गया है। हम लगातार विकसित हो रहे हैं और हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं और इस कार्य को हमारी इकाइयां और सरचनाओ द्वारा अत्यंत पेशेवर और समर्पण के साथ निष्पादित किया गया है और लगातार विकसित हो रहे हैं और हर गतिविधि पर हमारी पैनी नजर है।पूर्वी कमान के जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ कलिता ने आगे कहा कि बीते साल रूस- यूक्रेन युद्ध से सुरक्षा और आर्थिक गिरावट के रूप में भू-राजनीतिक गतिशीलता में गहरा बदलाव देखा गया। धीरे-धीरे भारत प्रशांत क्षेत्र में शक्ति केंद्र का स्थानांतरण हुआ, जिसने हमारे पड़ोस में अचानक महत्वपूर्ण विकास देखा है। उन्होंने कहा कि भारत चीन सीमा पर कोई कांटेदार तार नहीं है, इसलिए समस्या बनी हुई है और अप्रत्याशित घटनाएं घटती रही हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि हाल में जो हुआ उससे हम सतर्क हैं और सभी चुनौतियों के लिए तैयार हैं।उन्होने यह भी कहा कि चीन से लगती सीमाओं की निगरानी मजबूत करने के लिए सीमावर्ती गांवों के विकास पर भी हम जोर दे रहे हैं। विशेष रूप से सड़कों और सहायक सेवाओं में सुधार कर रहे हैं। सीमावर्ती गांवों के विकास व आधुनिकीकरण पर लगभग 22 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कलिता ने बंगाल में चिकन नेक के नाम से मशहूर सिलीगुड़ी कारिडोर को लेकर भी कहा कि सुरक्षा व रणनीतिक दृष्टि से यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जहां से कई देशों की सीमाएं लगती है। हम इस इलाके में पैनी नजर रख रहे हैं। बता दें कि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम सेक्टर में एलएसी की सुरक्षा का दायित्व पूर्वी कमान पर ही है।
राजबालक सुरक्षा और आर्थिक गिरावट के रूप में गतिशीलता में गहरा बदलाव देखा गया। धीरे-धीरे भारतप्रशांत क्षेत्र में शक्ति केंद्र का स्थानांतरण हुआ, जिसने हमारे पड़ोस में अचानक महत्वपूर्ण विकास देखा है। उन्होंने कहा कि भारत- चीन सीमा पर कोई कांटेदार तार नहीं है, इसलिए समस्या बनी हुई है और अप्रत्याशित घटनाएं घटती रही हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि हाल में जो हुआ उससे हम सतर्क हैं और सभी चुनौतियों के लिए तैयार हैं।विपक्षी दलों की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे जाने के सवाल पर पूर्वी कमान के प्रमुख कलिता ने कहा कि ये एक राजनीतिक प्रश्न है। इसलिए मैं उस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। मुझे लगता है कि राष्ट्र भारतीय सशस्त्र बलों पर भरोसा करता है।

ये जो अतनु मन है न मेरे पास यही है सारे फसाद की जड़ …अब तो धराधाम छूटने वाला है फिर भी अपने- पराए , इसके- उसके , जिस किसी की समस्याओं में बिन बुलाए बगटुट दौड़ते , भागते पहुंच जाता है । जानती हूं यहां सब के सब परम बुद्धिमान हैं किसी को मेरी सलाह की जरूरत नहीं है । सच तो ये है कि मेरी अल्पबुद्धि पर लोगों को मन ही मन तरस आता है सौजन्य वश कुछ कहते नहीं ..। खैर मेरी छोड़िए ..चिर शत्रु मन की सुनिये …।
हुआ यह कि गांव से मुख्तार आये ..उनसे खेती बाड़ी की जरुरी बातें खत्म हुई तो पूछा ” बताइए पास पड़ोस के लोगों का क्या हाल है ? ” उन्होंने बताया बलराम राउत के दोनों बेटों के बीच घर , खेत का बंटवारा हो गया । बिना किसी लड़ाई – झगड़े के घर में दो चूल्हे जलने लगे हैं । बात पूरी करते करते उनकी आवाज़ धीमी हो गई । यही नहीं लंबी सांस लेकर अदृश्य भगवान जी के प्रति हाथ जोड़कर माथे से लगा लिए ..। मेरा माथा ठनका तो पूछी क्या हुआ मुख्तार जी ? शायद उनका भी मन भरा हुआ था बताने लगे , भाई बंटवारा तो सदा से चला आ रहा है पर यहां तो बूढ़े बीमार अकेले बाप का बंटवारा हो गया …इतनी उम्र में अपने गांव गिराम में पहिली बार बाप का बंटवारा देखने को मिला । मेरे लिए भी अप्रत्याशित सूचना ही थी थोड़ी देर हमारे बीच मौन छाया रहा ..।
बलराम राउत पच्चीस एकड़ खेत के मालिक , शासकीय मिडिल स्कूल के हेडमास्टर , पेंशन भी लगभग दस हजार तो मिलती ही होगी..। उम्र का तकाज़ा कि सुगर पेशेंट हो गए हैं । पत्नी तो पंद्रह साल पहले ही मात्र हफ्ते भर की बीमारी में ही अचानक साथ छोड़ गई थी । अब तो बयासी साल के हो रहे हैं ऐसे में दोनों बेटे बहुओं से सेवा सत्कार की अपेक्षा थी तो ये कैसा अघटन घट गया ? मुख्तार जी को लौटने की जल्दी थी , चले गये ..दिन भर तो जरुरी गैरजरूरी कामों में लगी रही अब रात हुई कि मन असंयत होकर दौड़ते हुए गांव पहुंच गया ..। आंगन के बीच दीवाल खड़ी हो गई है जिसमें छोटा सा दरवाजा है । 5 फीट दस इंच लंबे बलराम राउत सिर झुकाकर उस दरवाजे से बड़े बेटे के आंगन में पैर रखते हैं जहां उन्हें हफ्ते भर रहना है। निर्धारित हफ्ता पूरा होने पर बड़ी बहू दरवाजा खोलेगी तब वापस छोटी बहू के शरणापन्न होना होगा ।
दरवाजा बंद कर दिया छोटी बहू ने ..। लंबी सांस लेकर शिथिल कदमों से बरामदे से लगे छोटे से कमरे में बिछी चारपाई पर बैठ जाते हैं ..ये किसकी चूड़ी खनकी , किसकी साड़ी का आँचल दिखाई दिया ? वो कुछ नहीं किसी की याद आई । वो खुद तो अब कभी वापस नहीं आएगी । सुनाई दिया कामवाली लड़की दरवाजे पर खड़ी कह रही है ” पानी रख दी हूँ , खाना अभी बना नहीं है कुछ चाहिए तो बताइए ? ” कुछ बोलने की मनःस्थिति तो थी नहीं हाथ के इशारे से उसे जाने को कह दिए ..।
ओह! सुगर की गोली भी तो लेनी है पर नाश्ता ? किससे कहें ? चलो एक दिन की तो बात है । अखबार पढ़ना था पर चश्मा तो उस घर में ही छूट गया दरवाजा तो बन्द हो गया है । किससे कहें चश्मे के लिए ? बेटों की सख्त हिदायत है मुख्य दरवाजे से दोनों घरों में उनका आना जाना नहीं होगा , आखिर समाज के चार लोगों को घर की बात क्यों पता चले ? थकी हारी मुस्कान मुरझाए ओंठों पर पसर गई ..बेटों की बेइज्जती की वजह बाबूजी का बंटवारा है।
ओहो ..मैं क्यों यह सब सोचने लगी ? वे लोग मेरे रिश्तेदार तो हैं नहीं ? अच्छा ये तो बताओ मैडम ! दो बेटों को बराबर दुलार दिया , पढ़ाया लिखाया दोनों ही ब्लाक ऑफिस में क्लर्क हो गए हैं घर से ही शहर आना जाना करते हैं …सब कुछ ठीक ही तो चल रहा था रही जमीन जायदाद के बंटवारे की तो यह भी कोई अनूठी बात तो नहीं है तो अनोखा क्या है ? अकल्पनीय है संस्कृति प्रधान , माता पिता को देव स्वरूप मानने वाले भारत के छोटे से गांव में पिता का बंटवारा ..हम तो पश्चिमी देशों की आलोचना करने में पंचमुख हो जाते हैं न ? गर्व करते हैं हमारे देश के परिवार में रची बसी सभ्यता , संस्कृति , संस्कारों की ..फिर ये क्या हुआ ..धुर गांव में पश्चिमी सभ्यता का प्रवेश कब , क्यों , कैसे हो गया ? सुनी हूं विदेशों में sun point एक जगह होती है जहां बुजुर्गों को छोड़ आते हैं , घर का दरवाजा बंद हो जाता है । जो रास्ता सामने दिखाई देता है वो वृद्धाश्रम के दरवाजे तक जाता है ।
ओह ! गांव में तो वृद्धाश्रम नहीं होते ?
मन ठठाकर हंस पड़ा । ओ मैडम , जरा ये सोचो कि बलराम राउत के पास तो हर महीने पेंशन की रकम आती है वे अकेले भी रह सकते हैं उन अभागों की सोचो जिनके पास कोई पेंशन नहीं होती ऐसे लोग कहां जाएं , क्या करें ?
उहुंक ..बात सिर्फ पैसों की नहीं है ..बुढ़ापे में जर्जर तन मन लेकर आदमी अपनों की देखभाल , थोड़ी सा आदर जतन चाहता है ,अपनों का साथ उसे मानसिक सम्बल देता है । आज की पीढ़ी अर्थपिशाच तो नहीं हो गई ? संवेदना शून्य पीढ़ी का यह कैसा आचरण है ..कल इनको भी तो बुढ़ापे में सहारे की जरुरत होगी ..। किस तरह का विकास है यह ? कैसी शिक्षा मिल रही है आज की पीढ़ी को ??समाज की प्रथम इकाई परिवार है जो भारत की विशेषता भी तो है । संयुक्त परिवार का विघटन सामाजिक सरोकारों को खत्म कर देगा ..।
सिर भारी हो गया ..चलें भाई कॉफी पी लेते हैं …ऐसा करती हूं आभासी दुनिया की सैर पर निकल पड़ती हूँ जहां भारी भरकम , आदर्शवादी पोस्ट पढूंगी …आभासी मित्रों की रिश्तों की दुहाई देते पोस्ट , किसी अनदेखे मित्र को जन्मदिन , विवाह वार्षिकी या किसी साहित्यकार की रचना प्रकाशित होने की बधाई , शुभकामना , बढ़िया सी इमोजी post करुंगी…। किसी नितांत अपरिचित की मृत्यु सूचना पर विनम्र श्रद्धांजलि लिखूंगी …।
या फिर किसी की आधे किलोमीटर लंबे लेख या अकविता पर गुरु गम्भीर टिप्पणी लिखूंगी । नहीं निदान किसी स्वादिष्ट व्यंजन बनाने की रेसिपी ही कंठस्थ करने की कोशिश करुंगी .। ये जो जन्मजात दुश्मन मेरा मन है न उसकी दौड़ को नियंत्रित करने की अचूक औषधि मिल गई है ..जी हां .ठीक समझे बंधु ! अशरण शरण सोशल मीडिया ..।
सरला शर्मा
दुर्ग